आखिरकार एक साथ आ जाएंगे, भारत पर 50% टैरिफ लगाने वाले अमेरिका के बदलने लगे सुर

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भारत पर अमेरिका द्वारा लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ बुधवार से लागू हो गया। इससे भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में भी खटास आ गई है, लेकिन इस बीच अमेरिका के सुर बदलने लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि आखिरकार अमेरिका और भारत दोनों एक साथ आ जाएंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि ये टैरिफ की ऊंची दरें सिर्फ भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के कारण नहीं हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर हैं कि व्यापार समझौते के लिए चल रही बातचीत कितनी लंबी खिंच रही है।

रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अतिरिक्त, दंडात्मक 25 फीसदी शुल्क लागू होने के कुछ ही घंटों बाद, समाचार एजेंसी फॉक्स बिजनेस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मुझे लगा था कि मई या जून में हम कोई समझौता कर लेंगे, भारत शुरुआती समझौतों में से एक हो सकता है। लेकिन उन्होंने हमें किसी तरह से अपने साथ जोड़ लिया।” भारत ने बातचीत के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं, लेकिन कृषि और छोटे निर्माताओं जैसे क्षेत्रों में कुछ सीमा रेखाएं हैं।

बेसेंट ने यह भी कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मुझे लगता है कि अंततः हम एक साथ आ जाएंगे।” विदेश मंत्री भारत द्वारा इस तर्क का खंडन करने के बारे में पूछे गए एक तीखे सवाल का जवाब दे रहे थे कि यूक्रेन के साथ युद्ध के बावजूद, अन्य देश भी रूस से तेल खरीदते हैं। उन्होंने अपने जवाब की शुरुआत में कहा, “यह एक बहुत ही जटिल रिश्ता है। राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। उन्होंने फिर बातचीत की गति का जिक्र किया। एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने इस हफ़्ते छठे दौर की वार्ता के लिए नई दिल्ली आने की योजना रद्द कर दी।

वहीं, सरकारी सूत्रों ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद पर बातचीत के रास्ते खुले हैं और इसे सुलझाने के प्रयास जारी रहेंगे। अमेरिका सरकार ने बुधवार से कुछ क्षेत्रों को छोड़कर भारत से अमेरिका को होने वाले वस्तुओं निर्यात पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगा दिया है। सूत्रों ने कहा, “भारतीय निर्यात की विविध प्रकृति को देखते हुए (शुल्कों का) प्रभाव उतना गंभीर होने की संभावना नहीं है, जितना आशंका जताई जा रही है।” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत और अमेरिका के बीच बातचीत के रास्ते खुले हैं। सूत्रों ने निर्यातकों को आश्वासन देते हुए कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है और यह केवल भारत और अमेरिका के बीच दीर्घकालिक संबंधों में एक अस्थायी चरण है।

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