ईरान के सुप्रीम लीडर नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय में शोक है। भारत में भी मुस्लिम समुदाय प्रदर्शन और मातम कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इस बीच हरिद्वार जिले के मंगलौर में पुलिस ने बिना अनुमति किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन और मातम कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। इमामबाड़ों पर पुलिस का पहला कड़ा कर दिया गया है। चेतावनी दी है कि भड़काऊ पोस्ट औ अफवाह फैलाने वालों पर मुकदमा किया जाएगा।
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान में बमबारी के बाद से क्षेत्र में लगातार विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है। अब पुलिस प्रशासन शांति व्यवस्था के लिहाज से सख्ती कर रहा है। पुलिस प्रशासन ने उन व्यक्तियों और समूहों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए हैं, जो विरोध प्रदर्शन या शोक सभाओं की योजना बना रहे हैं। कहा है कि बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी प्रकार का जुलूस या विरोध प्रदर्शन अवैध माना जाएगा।
इमामबाड़ों पर कड़ा पहरा, भड़काऊ पोस्ट पर ऐक्शन
नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके मंगलौर के इमामबाड़ों और सार्वजनिक स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की जा रही है। भ्रामक खबरों और भड़काऊ पोस्ट को रोकने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स की बारीकी से निगरानी की जा रही है।
अफवाह फैलाने वालों पर मुकदमा होगा
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा न करें। अफवाह फैलाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह ने बताया कि पुलिस ने सुरक्षा के दृष्टिगत कमर कस ली है, ताकि शांति व्यवस्था भंग न हो। सात से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर बिना अनुमति जुलूस निकालने पर कार्रवाई की जाएगी।
ईरान में फंसे छात्रों की सुरक्षित वापसी कराएं: निजामुद्दीन
मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने मंगलवार को सरकार से ईरान में फंसे नगर के 36 से अधिक छात्रों के वहां से सुरक्षित वापस लाने की मांग की है। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है।
उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि मंगलौर और आसपास के क्षेत्रों के लगभग 36 से ज्यादा छात्र और नागरिक इस समय ईरान के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं। कहा कि युद्ध की स्थिति के कारण वहां हवाई सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था अनिश्चित बनी हुई है। कहा कि राज्य सरकार तत्काल केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से संपर्क साधे, ताकि इन नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का मार्ग प्रशस्त हो सके। काजी निजामुद्दीन ने कहा, यह केवल राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि बेहद संवेदनशील और मानवीय मुद्दा है।
कहा कि युवाओं का भविष्य और जीवन दांव पर लगा हुआ है और वहां रह रहे भारतीय छात्रों के लिए भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से अपेक्षा की है कि वह भारत सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर सभी नागरिकों की घर वापसी के लिए विशेष अभियान चलाए।
लोगों की वापसी के हर संभव प्रयास: सचिव
प्रदेश के गृह सचिव शैलेश बगौली ने मंगलवार को बताया कि खाड़ी देशों में फंसे राज्य के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए यथासंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मंगलवार को हिन्दुस्तान से बातचीत में बगौली ने कहा कि इस मामले को लेकर दिल्ली में तैनात राज्य के स्थानिक आयुक्त लगातार केंद्र सरकार के अधिकारियों के संपर्क में है। विदेशों में फंसे लोगों के बारे में नियमित रूप से जानकारी ली जा रही है।










