उत्तराखंड में प्रधानाचार्य की सीधी भर्ती निरस्त, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया वजह

0
178

उत्तराखंड सरकार ने प्रधानाचार्य सीधी भर्ती को फिलहाल निरस्त कर दिया है। गुरुवार को शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने इस संबंध में लोक सेवा आयोग को पिछले साल भेजा गया अधियाचन वापस मांग लिया है। अधियाचन वापस मांगने के पीछे शिक्षकों के विरोध के साथ सुप्रीम कोर्ट के हाल ही मे दिए गए उस फैसले को भी वजह बताया जा रहा है, जिसमें एलटी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद 15 अक्तूबर को भी सचिव ने लोक सेवा आयोग को पत्र भेजा था।

शिक्षा सचिव ने गुरुवार को आयोग को दोबारा भेजे गए पत्र में कहा कि यह विषय अभी सरकार के विचाराधीन है। ऐसे में पूर्व में इन पदों पर भर्ती के लिए भेजा गया अधियाचन वापस कर दिया जाए। इस भर्ती के संबंध में सरकार भविष्य में जो भी निर्णय लेगी, उससे आयोग को अवगत करा दिया जाएगा। इसके साथ ही भर्ती पर लंबे समय से जारी ऊहापोह भी खत्म हो गई है।

यह है मामला

राज्य के सरकारी इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य के लंबे समय से रिक्त 1385 पदों में 692 पदों को सरकार ने वर्ष 2022 में विभागीय सीधी भर्ती से भरने का निर्णय लिया था। पहले इसमें केवल हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक पद पर दो साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक और 10 साल की सेवा पूरी कर चुके प्रवक्ताओं को शामिल किया था। राजकीय शिक्षक संघ ने तब भी इसका कड़ा विरोध करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया था।

शिक्षकों के विरोध को देखते हुए सरकार ने 29 सितंबर 2024 को लोक सेवा आयोग से होने जा रही चयन परीक्षा स्थगित कर दी थी। बाद में नियमावली को संशोधित कर एलटी कैडर के शिक्षकों को आवेदन के लिए पात्र मान लिया गया लेकिन शिक्षक इससे सहमत नहीं हुए। आगामी एक नवंबर को इगास के दिन शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के यमुना काॅलोनी स्थित आवास का घेराव करने का ऐलान भी किया है। इस भर्ती को लेकर शिक्षक दोफाड़ हो गए हैं। जहां तमाम शिक्षक भर्ती के विरोध में हैं वहीं बड़ी संख्या में समर्थन में भी आ गए हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here