कुदरत का कहर! उत्तराखंड में धराली के बाद चमोली में फटे बादल, क्या बोले डीएम-सीएम?

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उत्तरकाशी में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिला है। धराली के बाद अब चमोली के थराली में बादल फटने की घटना सामने आई है। ये घटना शुक्रवार रात्रि करीब साढ़े दस बसे ये हुई है। अतिवृष्टि होने से कई घरों में मलवा घुस गया है। दो लोग लापता हैं। वहीं सागवाड़ा गावं मे एक लड़की के भवन के अंदर मलबे मे दबने की सूचना है। इस घटना पर राज्य के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी दुख प्रकट किया है।

आपदा पर सीएम धामी ने जताया दुख

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा, जनपद चमोली के थराली क्षेत्र में देर रात बादल फटने की दुःखद सूचना प्राप्त हुई। जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। इस सम्बन्ध में निरंतर स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूँ और स्वयं स्थिति की गहन निगरानी कर रहा हूं। ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूँ।

आपदा पर डीएम ने क्या कुछ बताया?

चमोली जिला के डीएम डॉक्टर संदीप तिवारी ने घटना स्थल पर पहुंचकर इसकी जानकारी दी। कल रात धराली में बादल फटने की घटना हुई है। इससे धराली के आसपास के इलाकों में काफी नुकसान हुआ है। एक महिला की घर की दीवार में दबने की खबर है। संपत्तियों का काफी नुकसान हुआ है। सड़कें ब्लॉक हो गई हैं। रेस्क्यु अभियान चलाया जा रहा है। माननीय मुख्यमंत्री ने भी इस घटना पर संज्ञान लिया है।

अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश द्वारा बताया गया थराली में अतिवृष्टि से आयी आपदा का राहत बचाव कार्य जारी है, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर ठहराने की व्यवस्था की जा रही है, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम तैनात है, राहत बचाव कार्य किया जा रहा है।

क्या होता है बादल फटना?

बादल फटना (Cloudburst) एक प्राकृतिक घटना है, जिसमें अचानक और बहुत कम समय में किसी छोटे इलाके में बहुत तेज वर्षा हो जाती है। दरअसल जब हवा में मौजूद नमी से भरे बादल पहाड़ों या किसी विशेष स्थान पर अचानक फटते हैं, तो एक साथ ढेर सारा पानी धरती पर आकर कहर बरसा देता है।

आमतौर पर यह घटना पहाड़ी इलाकों में होती है, क्योंकि वहां बादल रुक जाते हैं और नमी तेजी से संघनित होकर भारी बारिश के रूप में गिरती है। 1 घंटे में 100 मिमी से अधिक बारिश हो तो उसे बादल फटना माना जाता है। एक साथ अचानक तेज बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन और जानमाल का नुकसान होता है। 2013 में केदारनाथ आपदा में कई जगह बादल फटने की घटनाएं हुई थीं।

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