सेना के संचार तंत्र को ज्यादा सुरक्षित और पूरी तरह स्वदेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। देहरादून स्थित डीआरडीओ की लैब ने एक ऐसा अत्याधुनिक और फुल-प्रूफ रेडियो सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिसे जल्द ही थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों ही सेवाओं में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जाएगा।
खासियत
यह सॉफ्टवेयर पारंपरिक रेडियो सेटों से बिल्कुल अलग है। यह एक सॉफ्टवेयर डिफाइन्ड रेडियो (SDR) प्लेटफॉर्म है, जिसमें रेडियो की महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं जैसे सिग्नल भेजना-पाना, एन्क्रिप्शन और डेटा प्रोसेसिंग सब कुछ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए होता है। इसकी खासियत यह है कि इसे जरूरत पड़ने पर सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट करके अपग्रेड किया जा सकता है, हार्डवेयर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
पहला एसडीआर सॉफ्टवेयर
DRDO ने इस रेडियो सॉफ्टवेयर को 6 अक्टूबर को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। यह भारत का पहला SDR सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर है, जिससे सेना के अलग-अलग रेडियो सिस्टम अब एक-दूसरे से आसानी से जुड़ सकेंगे। इससे संचार नेटवर्क ज्यादा आधुनिक, मानकीकृत और भविष्य में अपग्रेड करने योग्य बन जाएगा।
सेंध लगाना नामुमकिन
इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य संचार को पूरी तरह सुरक्षित रखना है। DRDO का कहना है कि यह सॉफ्टवेयर ऐसी तकनीक से तैयार किया गया है, जिसमें “किसी भी तरह की सेंध लगाना संभव नहीं” है। इससे आवाज और डेटा दोनों का ट्रांसमिशन एन्क्रिप्टेड होगा और युद्ध या मुश्किल भौगोलिक इलाकों में भी संदेश बिना रुकावट पहुंचेगा।
‘स्वदेशी तकनीक, मजबूत सुरक्षा और आसान अपग्रेड’ इन तीनों की वजह से यह नया सिस्टम सेनाओं की आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में बड़ा कदम है, साथ ही आने वाले समय में आधुनिक हथियारों और नए संचार नेटवर्क के साथ भी आसानी से जोड़ा जा सकेगा।










