उत्तराखंड ने खनन राजस्व क्षेत्र में नया रिकॉर्ड कायम किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश को खनन से कुल 1217 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जो निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक है। दावा है कि यह लगातार दूसरा वर्ष है, जब उत्तराखंड ने लक्ष्य से अधिक राजस्व अर्जित किया।
निदेशक-भूतत्व एवं खनिकर्म राजपाल लेघा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विभाग को 950 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था। अब इसके मुकाबले 1217 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। उनके अनुसार, इसमें से 1130 करोड़ रुपये ट्रेजरी, 80 करोड़ रुपये जिला खनिज फाउंडेशन न्यास और सात करोड़ रुपये एसएमईटी के रूप में जमा हुए हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी विभाग ने करीब 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1041 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था। इस तरह विभाग ने लगातार दूसरे वर्ष लक्ष्य से अधिक राजस्व हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान
खनन विभाग के माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम और ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर प्रोजेक्ट को 28 मार्च को नई दिल्ली में केंद्र सरकार ने सम्मानित किया। वित्त वर्ष 2025-26 में खान मंत्रालय की ओर से सीएम श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को दूसरा स्थान मिला, जिसके लिए 200 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई।
खनन क्षेत्र में सुधार
निदेशक के अनुसार, खनिज नीति और नियमावली को सरल बनाते हुए अवैध खनन, परिवहन, भंडारण पर रोक लगाई गई है। वैध खनन को बढ़ावा मिला है। पारदर्शी प्रक्रिया के तहत खनन पट्टों का आवंटन किया गया है।
माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम योजना के तहत चार मैदानी जिलों में 45 चेक गेट स्थापित किए गए हैं, जिससे अवैध खनन और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। खनिज परिवहन के लिए विशेष फीचर वाले ई-रवन्ना प्रपत्र लागू किए गए हैं, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज हो रही है।










