पूर्व CM हरीश रावत के ‘ब्राह्मण राग’ से चढ़ा सियासी पारा, बीजेपी ने लिया आड़े हाथ

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पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक बार फिर ब्राह्मण राग छेड़ा है। सोशल मीडिया पर ब्राह्मणों की भूमिका पर सामने आए उनके एक बयान ने पार्टी के भीतर और बाहर हलचल मचा रखी है। बयान के कई राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस दीवाली के बाद दुनिया में और बड़े पैमाने पर धूम-धड़ाका, युद्ध, मिसाइलें, और बरबादियां देखने को मिलेंगी। भारत में एक अनचाहा तनाव, असहिष्णुता निरंतर बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। भाजपा की राजनीति ने भारत के स्वाभाविक सनातनी मिजाज को बदल दिया है। देश की आजादी से पहले भी और आजादी के बाद भी उदार ब्राह्मण वादिता के हाथ में देश की राजनीति और समाज का संचालन रहा। कुछ कमियां थी, मगर राजनीति में सौहार्द व उदारता थी। आज उस उदारता को फिर से खोजने की आवश्यकता है। उत्तराखंड में कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के जरिए एक बड़े परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस संगठन सृजन में आने वाले दिनों में बहुत अच्छी संख्या में, जिलों में ब्राह्मण वर्ग से आने वाले नौजवानों को जिम्मेदारी पर देख सकेंगे। उदारता ब्राह्मण का स्वाभाविक गुण है। रावत का यह बयान महज संयोग नहीं माना जा रहा, बल्कि इस बयान को पार्टी के अंदर संगठनात्मक नियुक्तियों में अपनी पकड़ मजबूत करने और ब्राह्मण वोट बैंक पर राजनीतिक प्रभाव जमाने के इरादे से दिया माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो बयान संगठन के भीतर सियासी समीकरण साधने की कोशिश भी हो सकता है। हरीश पूर्व में भी इस तरह का बयान दे चुके हैं।

शीतकालीन यात्रा की पैरवी की

हरीश ने शीतकालीन यात्रा की पैरवी की है। उन्होंने होटिलियर्स और सरकार को सुझाव दिया है कि शीतकालीन यात्रा का विस्तार किया जाए। कहा कि उत्तराखंड में जहां होटल्स, लॉज और होमस्टेज हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। हमें शीतकाल में गुनगुनी धूप का आनंद लेने के लिए भी उत्तराखंड में आमंत्रित करना चाहिए। रावत सड़कों की स्थिति देखने पर्वतीय क्षेत्रों में जाएंगे।

बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रमुख मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस कभी क्षेत्र, धर्म तो कभी जातिवाद के नाम पर राजनीति करती है। जनता से नकारी जा चुकी कांग्रेस अब जातीय विभाजन का प्रयास कर रही है। जनता इनका चरित्र बेहतर जानती है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि हरि की कथा, हरि जाने। वैसे, उन्होंने कांग्रेस की परिपाटी को आगे बढ़ाने वाली बात ही कही है। कांग्रेस ने हमेशा ब्राह्मणों को मान सम्मान दिया है। हेमवती नंदन बहुगुणा से लेकर एनडी तिवारी, विजय बहुगुणा, इंदिरा हृदयेश, किशोर उपाध्याय इसके उदाहरण हैं।

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