बाप और दो बेटों की खुदकुशी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस मकान के विवाद में बाप और दो बेटों ने खुदकुशी की, उसे महिला सिपाही खाली कराना चाहती थी।
लखीमपुर खीरी के बांकेगंज के बाबूपुर गांव में जिस मकान के मालिकाना हक के विवाद में बुजुर्ग और उनके दो बेटों को जान गंवानी पड़ी, वह जमीन आबादी के नाम दर्ज है। एसडीएम गोला विनोद कुमार गुप्ता के मुताबिक, आबादी की जमीन पर जो काबिज होता है, वही मालिक होता है। इसके बावजूद महिला सिपाही आरती निगम मकान पर अपना हक जता रही थी। वहीं, शनिवार को रामनरेश के घर पर पुलिस का पहरा रहा और गांव में सन्नाटा पसरा रहा।
ग्रंट नंबर 11 पंचायत के बाबूपुर गांव में उक्त जमीन गोला तहसील के राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 3350 रकबा 1.607 हेक्टेयर पुरानी आबादी में दर्ज है। महिला सिपाही आरती और मृतक रामनरेश के घरों के बीच से रास्ता निकला है। ग्रामीणों के अनुसार, इस जमीन पर वर्षों से काबिज रामनरेश अपने दो बेटों सुधीर और मुकेश के साथ रहा करते थे। बेटी की शादी हो चुकी थी।
पहले सब ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन रामनरेश की भतीजी सिपाही आरती निगम और उसका परिवार तीन महीने से मकान पर मालिकाना हक जमाने लगे। कई बार दोनों परिवारों की वार्ता भी हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं मिला। तनाव बढ़ता गया और इसी तनाव में आकर बुजुर्ग रामनरेश ने फंदे से लटककर जान दे दी और फिर दोनों बेटों ने आत्महत्या कर ली। पिता की मौत की खबर सुनकर उसकी विवाहिता पुत्री शिल्पी गांव आई थी। लेकिन, इसके दूसरे दिन दोनों भाइयों ने भी आत्महत्या कर ली।
शुक्रवार शाम दोनों भाइयों के अंतिम संस्कार के बाद शिल्पी तिलकपुर गांव में अपने चाचा के घर चली गई। इस कारण रामनरेश के मकान में दिया तक नहीं जला। ग्रामीणों ने बताया कि महिला सिपाही आरती का दस हजार वर्ग फुट से अधिक जगह में मकान बना है। इतना बड़ा मकान होने के बावजूद वह रामनरेश के मकान पर दावा कर रही थी। जिससे रामनरेश और उसके दोनों पुत्र मुकेश, सुधीर काफी परेशान रहा करते थे। पिता की मौत के बाद दोनों बच्चे टूट गए थे। मगर किसी को यह नहीं पता था कि वह दोनों भी आत्महत्या कर लेंगे।
पुलिस भी कम जिम्मेदार नहीं
तीन माह से चल रहा यह विवाद बांकेगंज पुलिस चौकी में चार से अधिक बार पहुंचा। पुलिस विभाग में होने की वजह से पुलिस ने हर बार आरती का ही पक्ष लिया। ग्रामीणों का कहना है कि राम नरेश सीधे-साधे थे। विवाद के चलते उसके मन में मकान छीन लिए जाने का डर बैठ गया। पुलिस के सामने वह रोए-गिड़गिड़ाए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
पुलिस सुन लेती तो आत्महत्या की नौबत नहीं आती
पिछले तीन महीने से चल रहा यह विवाद कई बार बकीगंज पुलिस के सामने आया। रामनरेश ने हर बार पुलिस को पूरी घटना बताते हुए कहा कि उसने अपने घर की जमीन दूसरे से खरीदी थी, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी और राजस्व न्यायालय जाने की बात कहकर टरकाती रही। तीन माह में कम से कम चार बार यह मामला पुलिस के सामने पहुंचा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हर तरफ से आहत होने के बाद रामनरेश और उसके पुत्रों ने आत्महत्या का रास्ता अपनाया। बुधवार को दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश भी पुलिस चौकी पर हुई थी, पर बात नहीं बनी।
ये हैं नियम
गांवों में जमीनें राजस्व अभिलेखों में विभिन्न श्रेणियों में दर्ज होती हैं। इसमें जहां पर लोगों के घर होते हैं, वह जमीन आबादी में दर्ज होती है। इसके अलावा गांव में तालाब, चरागाह, खलिहान, श्मशान, कब्रिस्तान, परती और ग्राम समाज आदि की श्रेणी में दर्ज होती हैं। आबादी की जमीन पर हक उसी व्यक्ति का माना जाता है, जो उस पर काबिज होता है।
बाबूपुर गांव में जिस जमीन पर रामनरेश का मकान है, वह जमीन राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 3350 रकबा 1.607 हेक्टेयर आबादी के रूप में दर्ज है। नियमानुसार आबादी के रूप में दर्ज जमीन पर जो काबिज होता है, उसका अधिकार होता है। इस कारण मकान राम नरेश का ही माना जाएगा।– विनोद कुमार गुप्ता, एसडीएम, गोला।