मेरे जीते जी नकल माफिया… धामी की दो टूक पर भाजपा सांसद बोले– CBI जांच में क्या बुराई

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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा को लेकर प्रदेश में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि आंदोलित युवाओं को एसआईजी जांच रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। दूसरी तरफ भाजपा सांसद और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सीबीआई जांच का जोर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं की यही मांग है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है।

शनिवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि वो अपने जीते जी किसी नकल माफिया को उत्तराखंड के युवाओं के हक नहीं छीनने देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के रिटायर जज की निगरानी में एसआईटी ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रत्येक जिले में जाकर एसआईटी अधिकारी जन संवाद कर अभ्यर्थियों और आमजन की शिकायत-सुझाव को लेंगे। इसकी शुरूआत आज हरिद्वार से कर दी गई है।

मेरे जीते जी नकल माफिया कामयाब नहीं होगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में स्नातक स्तरीय परीक्षा पर जांच रिपेार्ट और अंतिम कार्यवाही होने तक रोक लगाई जा चुकी है। जांच रिपेार्ट के आधार पर सरकार आगे और भी ठोस कदम उठाएगी। यह कड़े नकल विरेाधी कानून का ही असर है कि पिछले चार साल में विभिन्न विभागों में युवाओं की 25 हजार नौकरियां लगी हैं। पहले नकल माफिया की वजह जहां एक परीक्षा में पास होना मुश्किल होता था, अब कई मेधावी दो से तीन परीक्षाओं में भी पास होने में कामयाब रहे।

धामी ने कहा, मेरे जीते जी किसी भी नकल माफिया की साजिश प्रदेश में कामयाब नहीं हो सकती। जो भी तत्व भर्ती प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित करने की साजिश करेगा, उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा।

सीबीआई जांच पर जोर

पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत ने यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच की मांग पर सहमति जताई है। शनिवार को दून विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने पहुंचे त्रिवेंद्र ने मीडिया से बातचीत में ये बातें कही।

उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षा में नकल का मामला सामने आते ही प्रदेश सरकार ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की। एसआईटी जांच शुरू कराई जा चुकी है। पर, इस वक्त प्रदेश में जगह-जगह से युवाओं की ओर से सीबीआई जांच की मांग उठ रही है। मुख्यमंत्री को भी युवाओं को इसका आश्वासन दे देना चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं को भी जागरूक करना होगा कि सभी को सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल है। सरकारें कहती तो हैं लेकिन यह संभव भी नहीं है। ऐसी नीतियां बनाईं जानी चाहिए जिससे युवा नौकरियां मांगने वाले के बजाए नौकरी देने वाले बने। उन्हें स्वरोजगार के प्रति प्रेरित किया जाना चाहिए।

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