सब्जी, अनाज, गाड़ी या जमीन-जायदाद की बोली लगते आपने सुनी होगी, लेकिन बरेली में एक अनोखी मंडी लगती है, जहां बोली रावण के पुतलों पर लगती है। हर साल दशहरा पर बरेली के तीन इलाके कालीबाड़ी, डीडीपुरम और बिहारीपुर कसगरान की ‘रावण वाली गली’ में सैकड़ों पुतले सजते हैं। यहां 20 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक के रावण बिकते हैं, जिनकी ऊंचाई डेढ़ फुट से लेकर 30 फुट तक होती है। इस मंडी से पुतला खरीदने केवल बरेली वाले ही नहीं आते, बल्कि उत्तराखंड, पीलीभीत, बदायूं और दूसरे जिलों के लोग भी पहुंचते हैं। कारीगरों का अनुमान है कि इस बार रावण के पुतलों का कारोबार 25 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
बिहारीपुर कसगरान का मोहल्ला ‘रावण वाली गली’ नाम से मशहूर है। कभी इस गली में इतनी तादाद में पुतले बनाए जाते थे कि पैदल निकलना मुश्किल हो जाता था। उस समय दूर-दराज से लोग रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले खरीदने आते थे। अब पहले की तरह मांग नहीं रही, लेकिन परंपरा जारी है। कालीबाड़ी निवासी बाबू कहते हैं कि उनकी पत्नी रावण के पुतले बनाती हैं और वह बेचने का काम संभालते हैं। इलाके के कई राजपूत परिवार की महिलाएं पुतले बनाने में जुटी रहती हैं। पुतले बनाने के बाद उन्हें बिक्री के लिए मेन रोड पर सजाकर रखा जाता है।
बरेली में रावण का पुतला बनाने के काम में मुसलमान परिवारों की अहम हिस्सेदारी है। फूटा दरवाजा निवासी शहंशाह बताते हैं कि उनके पिता कल्लू मियां ने ‘रावण वाली गली’ में यह हुनर सीखा। बाद में वे बड़े आयोजनों के रावण बनाने लगे। पिता के बाद अब पूरा परिवार इस काम में जुटा है। शहंशाह के मुताबिक हर साल उनके पास नैनीताल, हल्द्वानी, भवाली, काठगोदाम समेत बदायूं और पीलीभीत से भी ऑर्डर आते हैं।
बदली परंपरा, बदली मंडी
रावण वाली गली के कारीगर संजय चंद्रा बताते हैं कि पहले इतनी डिमांड थी कि महीनों पहले से तैयारी करनी पड़ती थी। अब बड़े पुतलों की मांग कम हो गई है, जिससे गली की रौनक भी वैसी नहीं रही। पहले लोग पुतले खरीदकर खुद ले जाते थे, लेकिन अब ज्यादातर रामलीला समितियां कारीगरों को बुलाकर पुतले बनवाती हैं। जोगीनवादा बनखंडी नाथ मंदिर रामलीला समिति के लिए पुतला बनाने वाले बब्लू कहते हैं कि उनका परिवार अलग-अलग जगहों पर जाकर पुतले बनाता है। उनके पिता पिथौरागढ़ में पुतले बना रहे हैं तो भाई कैंट की रामलीला के लिए पुतला तैयार कर रहे है।
कारोबार और परंपरा दोनों
भले ही डिमांड में कमी आई हो, लेकिन बरेली की ‘रावण वाली गली’ की पहचान अब भी कायम है। यहां हर साल दशहरे से पहले दो दिन तक रावण की मंडी सजती है, जहां कोई 20 रुपये का छोटा पुतला खरीद लेता है तो कोई 15 हजार रुपये का 30 फुट ऊंचा रावण अपने साथ ले जाता है। यही अनोखापन बरेली को देश के नक्शे पर अलग पहचान देता है।










