युवक ने मां और चाचा का रेता गला, फिर खुद भी दे दी जान; कमरे में मिलीं तीन लाशें

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एक दिल दहला लेने वाला मामला सामने आया है। जहां सदर कोतवाली क्षेत्र के चौफरेवा मोहल्ले में बुधवार शाम एक युवक ने बंद कमरे में अपनी मां और चाचा का गला काटने के बाद खुद भी जान दे दी। मां और बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल चाचा ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया। देर रात घर की तलाशी में सुसाइड नोट भी बरामद हुआ।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के चौफरेवा निवासी सुशील श्रीवास्तव अपने 28 वर्षीय बेटे अमर, 55 वर्षीय पत्नी सुशीला और छोटे भाई 51 वर्षीय सुनील उर्फ गुड्डू के साथ रहते हैं। सुशील ने बताया कि वह बुधवार दोपहर शहर में ही ब्याही बेटी से मिलने गए थे। शाम करीब पांच बजे उन्होंने घर पर फोन किया लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। चिंता होने पर वह घर लौटे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। मोहल्ले के लोगों और पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया। कमरे में अमर, सुशीला और सुनील खून से लथपथ पड़े थे। अमर और सुशीला की मौत हो चुकी थी, जबकि सुनील की सांसें चल रही थीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, इलाज से पहले ही उसकी भी मौत हो गई।

सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंचे एएसपी महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कमरे से खून से सनी चार ब्लेड और जहर की पुड़िया बरामद हुई है। देर रात एक सुसाइड नोट भी मिला है। प्रारंभिक जांच में प्रतीत होता है कि अमर ने मां और चाचा की हत्या कर खुद भी आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट के आधार पर कुछ वकीलों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एक वकील को हिरासत में लेने पर अन्य साथियों ने कोतवाली में हंगामा किया, जिसे पुलिस ने शांत कराया।

क्यों, कैसे और किस लिए हुई हत्या, पुलिस के पास इसका जवाब नहीं

बुधवार शाम एक घर में हुआ खूनी खेल क्यों,कैसे और किस लिए हुआ इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल न तो पुलिस के पास है और न परिजनों के पास। बस है तो तीन रक्तरंजित लाशें। घटनास्थल में मिली जहर की पुड़िया, चाय के खाली कप और खून से सनी ब्लेडें। ये सब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि पहले चाय के साथ जहर पिलाया गया। इसके बाद ब्लेड से गला रेत हत्या करने के बाद खुदकुशी की गई।

शहर से जुड़े चौफेरवा मोहल्ले के एक घर के छोटे से कमरे में बुधवार शाम जो हुआ, उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। बंद कमरे में खून से लथपथ तीन लोग। जिसमें दो मौके पर ही मृत हो चुके थे। देवर अंतिम सांसे गिन रहा था। जो कुछ हुआ उसकी कमरे में हुआ क्योंकि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और उसे तोड़ कर ही तीनों को बाहर निकाला गया। चौफेरवा निवासी 60 वर्षीय सुशील कुमार श्रीवास्तव अपने इकलौते बेटे अमर, पत्नी सुशीला और अविवाहित भाई सुनील के साथ तमाम झंझावातों के बीच गुजर बसर कर रहे थे। बेटी दीपिका श्रीवास्तव है, जो शहर के ही पीरनपुर मोहल्ले में ब्याही है। सुशील बुधवार दोपहर घर से बेटी से मिलने उसकी ससुराल गए थे, लेकिन शाम को जब लौटे तो घर का नजारा देख उनके होश उड़ गए। वहीं दूसरी ओर इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। लोग घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।

बहन हुई बदहवास

घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। वहीं मृतक अमर श्रीवास्तव की बहन दीपिका श्रीवास्तव को रो-रोकर बुरा हो गया। दीपिका ने बताया कि अमर उसका इकलौता भाई था और अविवाहित था। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटना से पूरे मोहल्ले में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। वहीं पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आसपास लोगों से पूछताछ हो रही है।

सुशील को नहीं थी घटना की भनक

सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह 11 बजे वह घर से निकले थे। घर में सब कुछ ठीक था। विवाद जैसी कोई बात नहीं थी। अमर, उसके चाचा और पत्नी घर में मौजूद थे। डेढ़ बजे के करीब वह बेटी के घर पहुंच गए थे। शाम को जब फोन किया है तो किसी ने फोन नहीं उठ रहे थे। चिंता होने पर वहां से घर के लिये निकल पड़े। शाम करीब पांच बजे जब घर पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। सुशील ने हत्या की बात से इंकार किया है।

लंबी बीमारी से जूझ कर संभला था अमर

जानकारी के मुताबिक कर्ज के बोझ में दबा अमर श्रीवास्तव गंभीर बीमारी की जद में आ गया था। आय के श्रोत बंद होने से वह कर्ज लेकर कई साल इलाज करा रहा था। करीब तीन साल चले इलाज के बाद वह संभव पाया था। इस बीच घर बिक्री कर कुछ कर्ज अदा करने के साथ बहन की शादी दी और चौफेरवा में प्लाट लेकर एक कमरा बना कर परिवार के साथ रहता था। अभी वह बीमार और हालात से कुछ संभला ही था कि वह मौत के आगोस में समा गया।

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