राजधानी लखनऊ में करोड़ों के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) जानकीपुरम शाखा का ब्रांच हेड (मैनेजर) सालों से जालसाज गिरोह के साथ मिलकर बैंक को करोड़ों की चपत लगा रहा था। वह जाली दस्तावेजों के आधार पर मुद्रा, ऑटो और व्यवसाय के नाम पर लोन पास करता था। अधीनस्थ अफसरों की यूजर आईडी और पासवर्ड इस्तेमाल कर लोन पर स्वीकृति दे देता था। एसटीएफ के एएसपी के मुताबिक मुकदमा वजीर हसन रोड इनकम टैक्स कॉलोनी निवासी राज बहुत गुरंग ने दर्ज कराया था। एसटीएफ इस मामले की जांच कर रही थी। जांच में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा पाए जाए जाने पर चार की गिरफ्तारी की गई। आशंका जताई गई है कि ये लोग करीब 10 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा कर चुके हैं।
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक गिरफ्तार जालसाजों में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का ब्रांच हेड गौरव सिंह निवासी विकासनगर (मूल पता कानपुर नगर बिधनू क्षेत्र का खेरसा गांव) है। इसके अलावा जानकीपुरम गार्डेन सहारा स्टेट गेट नंबर दो का रहने वाला नावेद हसन, राजाजीपुरम आलमनगर मानस विहार का अखिलेश तिवारी और उन्नाव के हसनगंज इलाके के नंदौली गांव का इंद्रजीत सिंह को पकड़ा गया है। ये लोग सुशांत गोल्फ सिटी इलाके के ओमेक्स सिटी अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल पर ऑफिस बनाकर जालसाजी करते थे। वहीं से सबको पकड़ा गया है। उन्होंने बताया कि ब्रांच हेड लोन की रकम कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बनाई गई फर्म के खातों में ट्रांसफर कराता था। वहां से पैसा निकालकर गिरोह में बांट देता था। गिरोह ने करोड़ों की लग्जरी गाड़ियां भी खरीदीं।
ये हुई बरामदगी
इंस्पेक्टर साइबर थाना ब्रजेश कुमार यादव के मुताबिक गिरोह के पास से चार कारें (एक बीएमडब्लू एक्स, सुजुकी बलेनो, सुजुकी फ्रॉन्क्स, महिन्द्र सुपरो) पांच मोबाइल, एक डेक्सटॉप, जाली आधार कार्ड, दो जाली डीएल, 268 वर्क लोन प्रक्रिया के संबंधित दस्तावेज, एक बिल बाउचर रिलायंस डिजिटल, दो चेकबुक, एक प्रिंटर और 750 रुपये बरामद किए गए हैं।
तीन लाख लोन के दस्तावेज पर पास करा लिया 25 लाख
एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक वजीर हसन रोड इनकम टैक्स कॉलोनी निवासी राज बहादुर गुरुंग को दो से तीन लाख रुपये की आवश्यकता थी। यह जानकारी उन्होंने वर्ष 2023 में अपने परिचित इंद्रजीत सिंह को दी। इंद्रजीत ने बताया कि उसके मित्र नावेद हसन का दोस्त गौरव सिंह यूबीआई जानकीपुरम में मैनेजर है। वह बहुत आसानी से लोन करा देगा। इसके बाद इंद्रजीत और नावेद, राज बहादुर को लेकर बैंक पहुंचे। पैनकार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज ले लिए। मैनेजर के केबिन में बैठाकर दस्तावेजों और विड्राल फॉर्म पर मिलकर करीब 25-30 जगह हस्ताक्ष कराए। इसके बाद बोले लोन जल्द ही मिल जाएगा।
कुछ दिन तक लोन नहीं पास होने पर राज बहादुर ने पूछा तो इंद्रजीत ने बताया कि उसका लोन नहीं पास हो सकेगा। उधर, मैनेजर के साथ मिलकर 9,80,000 रुपये का मुद्रा लोन 24 अप्रैल 2023 और 15 लाख का कार लोन 10 मई 2023 को करा लिया। सारे रुपये विड्राल से निकाल लिए। पांच से छह महीने बाद ईएमआई ड्यूज का मैसेज आने पर राज बहादुर को लोन की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत की। जांच एसटीएफ को कुछ दिन पहले मिली।
10 साल से कर रहे थे फर्जीवाड़ा
इंस्पेक्टर साइबर थाना ब्रजेश कुमार यादव के मुताबिक जालसाजों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर हिंद ट्रांसपोर्ट कंपनी और कई अलग-अलग नाम से फर्म के खाते खोले। लोन की रकम उन्हीं खातों में ट्रांसफर कर निकालते थे। नावेद ने पूछताछ में बताया कि 10 साल पहले उसकी दोस्ती आमिर एहसन से हुई थी। आमिर की फर्म के पंजीयन में कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग किया था। आमिर की जगह उसका नाम मो. अरशद खान और पिता का नाम अनवर खान लिखकर फर्जीवाड़ा किया था। उसी आधार पर वर्ष 2025 में एसबीआई गोमतीनगर से लोन कराया। वर्ष 2017 में राज खुला तो मुकदमा दर्ज हुआ। 2021 में नावेद, आमिर और अखिलेश जेल भी गए थे।
20 लोगों के नाम पर कराया करोड़ों का मुद्रा लोन
गिरोह ने पूछताछ में एसटीएफ को बताया कि ब्रांच मैनेजर गौरव की मदद से 20 लोगों के नाम से करोड़ों रुपये का मुद्रा लोन करा चुके हैं। इंद्रजीत मार्केट से लोन के लिए ग्राहक खोजकर लाता था। बैंक में दस्तावेज जमा कराने के दौरान उनकी कई अन्य कॉपी भी करा ली जाती थी, जिससे लोन कराने में दस्तावेजों की कमी न हो। लोन कराने के बाद दस्तावेजों में अपने मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी डालते थे, जिससे ओटीपी उन्हीं के पास आए। फोटो और आधार कार्ड से छेड़छाड़ भी करते थे। गिरोह के खिलाफ गुड़ंबा, गोमतीनगर समेत कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। एसटीएफ गिरोह के बैंक खाते, ई-वालेट और अन्य जानकारियां जुटा रही है।









