उत्तराखंड के जौनसार-बावर में खत शैली के 25 गांवों ने अमीरी-गरीबी का फर्क मिटाने के लिए अनूठा फैसला लिया है। अब इन गांवों में होने वाली शादियां और अन्य शुभ आयोजन बेहद सादगी से होंगे। सामाजिक समानता के लिए न अब महंगे तोहफे लिए और दिए जाएंगे और न शराब और फास्ट फूड परोसा जाएगा।
दोहा गांव में सदर स्याणा राजेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में खत शैली के सभी गांवों से लोग शामिल हुए। बैठक में सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ये फैसले खत शैली के सभी गांवों में लागू होंगे। इनमें मागटी, नगऊ, क्यावा, हयो, दोउ, दोहा, छूटऊ, मटियावा, बजऊ, कैत्री, घिंगौऊ, कुनावा, बजऊ आदि गांव शामिल हैं।
एक लाख का जुर्माना
नियम का उल्लंघन करने पर संबंधित परिवार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ उनके कार्यक्रम का बहिष्कार किया जाएगा।
सिर्फ तीन गहने ही पहनेंगी महिलाएं
निर्णय लिया गया कि शादी और रायणी भोज में महिलाएं केवल तीन गहने ही पहनेंगी। इसमें नाक में फूली, कान में झुमकी या तूंगल, गले में कांडुडी या मंगलसूत्र शामिल है।
कंधाड़ और खारसी में भी हो चुकी पहल
अक्तूबर में चकराता के कंधाड़ गांव में भी फैसला हुआ था कि शादी जैसे कार्यक्रमों में महिलाएं तीन गहने ही पहनेंगी। इसके बाद 10 नवंबर को खारसी में भी यह फैसला लिया गया। गांव के स्याणा शूरवीर सिंह पंवार ने बताया था कि इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी खुद को उपेक्षित महसूस नहीं करेंगे। सोने के दाम आसमान छू रहे हैं। हर व्यक्ति गहने नहीं बना पाता है।










