शादी से 20 दिन पहले बहन ने भाई को जिगर किया दान, फिर भी बचा न पाई जान

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बहन-भाई के अटूट प्रेम की मिसाल देखने को मिली। यहां एक बहन ने अपने बीमार भाई की जान बचाने के लिए खुद की परवाह किए बिना जिगर (Liver) का बड़ा हिस्सा दान कर दिया। अफसोस की बात है कि सोमवार सुबह भाई मौत से हार गया। जिस बहन ने अपना अंग दान किया उसकी 27 नवंबर को शादी होनी है। भाई की हालत बिगड़ने पर उसने अपनी शादी की तारीख भी आगे बढ़ा दी थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। भाई की मौत की खबर से घर में कोहराम मच गया। सबकी आंखें नम हैं, ग्रामीणों की नम आंखों से यही निकला कि ऐसी बहन हर किसी को नसीब हो।

मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के नागल क्षेत्र के भलस्वा ईशापुर के राजपूत समाज के गजेंद्र की बेटी वैशाली का है, जिसे मुफलिसी में शिक्षा ग्रहण कर दिल्ली के एक विभाग में सरकारी नौकरी मिली। वैशाली की 27 नवंबर को शादी होनी है, लेकिन इससे पहले ही उसके भाई नितिन को बीमारी के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। चिकित्सकों ने बताया कि नितिन की लिवर डोनेट से ही जान बच सकती है।

नितिन की बहन वैशाली ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने लिवर का अधिकतम हिस्सा भाई को डोनेट कर दिया और अपनी शादी की तारीख पीछे हटा दी, लेकिन बहन द्वारा लीवर देने के बाद भी सोमवार सुबह उपचार के दौरान नितिन की मौत हो गई। बेटे की मौत से परिजनों कोहराम मचा है। वहीं, शादी की खुशियां भी मातम में बदल गई हैं।

बहन ने की हर संभव मदद, फिर भी नहीं बच सकी जान

भाई की जान बचाने को बहन वैशाली ने हर संभव प्रयास किया। इसको लेकर ग्रामीणों ने भी उसकी सरहाना की, लेकिन वैशाली को क्या पता था कि लिवर डोनेट करने के बाद भी उसके भाई की जान नहीं बच पाएगी। बहन ने अपना पूरा फर्ज निभाया।

नितिन की मौत से ग्रामीण भी गमजदा

ग्रामीण दीपक राणा, कुशल पाल, योगेश, बृजपाल, प्रमोद, अजय शर्मा बताते हैं कि एक गरीब परिवार की बेटी ने अपने अंतिम प्रयास तक अपने भाई को बचाने का प्रयास किया, जिस कारण पूरा गांव उसकी सराहना करता हैं, लेकिन बहन के बलिदान के बावजूद भी भाई की जान नहीं बच पाई है। इससे ग्रामीणों में भी शोक की लहर है। बहन ने भाई की जान बचाने को हर संभव प्रयास किया था।

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