180 दिन की प्लानिंग और वेस्ट यूपी में ‘वार रूम’; गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड में नए खुलासे

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हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा की हत्या कोई अचानक हुई गैंगवार नहीं, बल्कि आधे साल तक बुनी गई एक खौफनाक साजिश का नतीजा थी। उत्तराखंड एसटीएफ की नई थ्योरी ने खुलासा किया है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए 180 दिनों की लंबी प्लानिंग की गई थी, जिसमें कातिलों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए देहरादून से 200 किलोमीटर दूर पश्चिमी यूपी में अपना ‘वार रूम’ बनाया था। पुलिस के मुताबिक, मास्टरमाइंड्स ने सीधे दून में डेरा डालने के बजाय पड़ोसी राज्य से लगातार रेकी कर विक्रम के पल-पल के मूवमेंट को ट्रैक किया और जब भाई की जिम मेंबरशिप के जरिए उसकी सटीक लोकेशन कन्फर्म हुई, तब इस ‘फुलप्रूफ’ मर्डर को अंजाम दिया गया।

200 किमी दूर पश्चिम यूपी में ‘वार रूम’

हत्या का जाल बिछाने वाले मास्टरमाइंड्स को शुरुआत में यह तक नहीं पता था कि विक्रम दून में किस जगह छिपा है। उसकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए एक स्पेशल रेकी टीम लगाई गई थी।इस टीम ने चालाकी दिखाते हुए देहरादून से करीब 200 किलोमीटर दूर पश्चिम यूपी में एक कमरा किराए पर लिया और वहां से लगातार अप-डाउन कर विक्रम की तलाश शुरू की।

एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है कि नवंबर में हत्यारों को विक्रम के गुप्त ठिकाने की भनक लग गई थी। इसके बाद हत्या का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया गया। इस बीच विक्रम ने अपने भाई की मेंबरशिप पर सिटी मॉल स्थित जिम जाना शुरू कर दिया था। यह भी एक बड़ा सवाल है। फिलहाल, पुलिस और एसटीएफ केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले (हथियार और वाहन मुहैया कराने वाले) मददगारों तक ही पहुंच पाई है। असली शूटर और पूरी साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड अब भी फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए एसटीएफ जल्द ही झारखंड में कैंप स्थापित करने जा रहा है और वहां एक बड़ा ऑपरेशन चलाने जा रहा है।

बाइक के बाद कार का इस्तेमाल

पुलिस जांच में शूटरों के भागने का एक शातिर पैटर्न सामने आया है। वारदात को अंजाम देने के बाद शूटरों ने महज पांच-छह किलोमीटर का सफर तय किया और मुख्य बाइक को लावारिस छोड़ दिया। इसके बाद वे पहले से तय एक दूसरे दोपहिया वाहन पर बैठे और हरिद्वार पहुंचे। हरिद्वार में मददगारों ने उनके लिए कार की व्यवस्था कर रखी थी।

एसटीएफ ने शूटरों का दूसरा मददगार भी पकड़ा

झारखंड के हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा हत्याकांड में दून पुलिस और एसटीएफ ने शूटरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट (संसाधन) और फंडिंग मुहैया कराने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। रविवार को दोनों आरोपी देहरादून पहुंचे। इनमें एक ट्रांजिट रिमांड पर है। स्थानीय पुलिस सोमवार को इनसे पूछताछ के बाद हत्याकांड के राज से पर्दा उठा सकती है।

एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक राजकुमार शर्मा है। राजकुमार के तार सीधे तौर पर हत्यारों की मदद से जुड़े हैं। जांच में सामने आया है कि शूटरों ने हरिद्वार में जो बाइक किराये पर ली थी, उसका भुगतान राजकुमार शर्मा के ही बैंक खाते से यूपीआई के जरिए किया गया था। इसी डिजिटल ट्रेल ने पुलिस को राजकुमार तक पहुंचाया। एसएसपी ने बताया कि राजकुमार रेलवे में ठेकेदारी करने वाले यशराज का पिता है। ऐसे में पुलिस को शक है कि इस साजिश में यशराज का भी हाथ हो सकता है। इसकी जांच की जा रही है।

गिरफ्तार किया गया दूसरा आरोपी वह शख्स है, जिसने देहरादून में शूटरों को संसाधन उपलब्ध कराए। सोमवार को पुलिस इस आरोपी की पहचान और इसकी भूमिका का खुलासा करेगी। शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि यह कोई सामान्य हत्या नहीं थी बल्कि इसे एक सोची-समझी और लंबी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया गया।

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