26 हजार के लालच में सरकारी डॉक्टर गर्भवती को प्राइवेट अस्पताल ले गई, खुद किया ऑपरेशन; मौत

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उत्तराखंड के सितारगंज में करप्शन का घिनौना मामला सामने आया है। यहां उप जिला चिकित्सालय में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिद्दीकी पर गंभीर आरोप लगे हैं। प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची गर्भवती महिला को उन्होंने नगर के एक निजी अस्पताल आस्था मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल में रेफर करवा दिया और वहां जाकर ऑपरेशन किया।

ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ने पर महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। जांच में पाया गया कि डॉ. नेहा सिद्दीकी ने नियमों के विरुद्ध निजी अस्पताल में ऑपरेशन किया। वहीं आस्था हॉस्पिटल में न तो विशेषज्ञ चिकित्सक मिले और न ही पंजीकृत पैरा मेडिकल स्टाफ।

26 हजार के लालच में प्रसूता की मौत

शिकायतकर्ता बक्शीश सिंह निवासी ग्राम पिंडारी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त की रात उनकी 24 वर्षीय पुत्री काजल को प्रसव पीड़ा के बाद उप जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां भर्ती करने के बाद रात 2 बजे ऑपरेशन की बात कही गई और आस्था हॉस्पिटल ले जाने को कहा गया।

डॉ. नेहा सिद्दीकी के फोन पर एम्बुलेंस पहुंची और 26 हजार रुपये में ऑपरेशन तय हुआ। ऑपरेशन के बाद बच्चे को दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 24 अगस्त को काजल को सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया। 25 अगस्त को देहरादून के जौलीग्रांट हिमालयन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि कमीशनखोरी के लिए सरकारी डॉक्टर और निजी अस्पताल स्टाफ ने उनकी बेटी की जान से खिलवाड़ किया।

आस्था हॉस्पिटल के संचालन पर रोक

जांच रिपोर्ट के बाद सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने 26 सितम्बर को नोटिस जारी कर आस्था हॉस्पिटल का पंजीकरण अस्थायी रूप से निरस्त कर दिया। अस्पताल संचालन पर रोक लगा दी गई है। तीन दिन में जवाब दाखिल न करने पर अस्पताल को सील करने की चेतावनी दी गई है।

जांच में खुली पोल

महानिदेशक स्वास्थ्य के आदेश पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह और वरिष्ठ गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. कनक बनौघा ने जांच की। जांव टीम ने शिकायतकर्ता बक्शीश सिंह, उप जिला चिकित्सालय में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिद्दीकी, सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव, निश्चेतक डॉ. संजय कूट व डॉ. रीना यादव, आस्था हॉस्पिटल के डॉ. राजेश कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक विजय कालरा के बयान दर्ज किये। रिपोर्ट में पाया गया कि डॉ. नेहा सिद्दीकी ने मरीज को निजी अस्पताल भेजकर नियमों का उल्लंघन किया।

आस्था हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सक और पंजीकृत पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं था। ओटी की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। मरीजों को भ्रमित कर इलाज किया जाता है। जांच टीम ने आस्था हॉस्पिटल के खिलाफ 75 हजार रुपये का जुर्माना और लाइसेंस निरस्त/निलंबन की संस्तुति की। साथ ही सीएमएस को उप जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।

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