दुश्मन का दुश्मन दोस्त; जेल की बेइज्जती ने गैंगस्टर विक्रम शर्मा की जान ली, हत्याकांड के 8 किरदार

0
92

जुर्म की दुनिया में ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है’। विक्रम हत्याकांड में यह कहावत सच साबित हुई। पुलिस और एसटीएफ की तफ्तीश में सामने आया है कि इस खौफनाक वारदात की पटकथा दो ऐसे लोगों के गठजोड़ से तैयार हुई जो विक्रम के आतंक से त्रस्त थे।

विक्रम शर्मा ने दो लोगों का जेल में टार्चर कराया था, जिन्होंने इस बेइज्जती का बदला लिया और एक से रेलवे ठेकेदारी हासिल करने के लिए परेशान किया और रंगदारी मांगी। सोमवार को मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो लोगों को अरेस्ट किया। इसमें अक्षत ठाकुर निवासी एमई स्कूल रोड, बाबा बरूदा अपार्टमेंट, जुगसलाई, जमशेदपुर, झारखंड और राजकुमार निवासी गाराबास बाग बेड़ा, जमशेदपुर, झारखंड शामिल है।

जेल में बेइज्जती का बदला लिया

इस कहानी का पहला किरदार शूटर विशाल है। विक्रम के चेले अखिलेश और उसके साथियों ने जेल के भीतर विशाल को बुरी तरह टॉर्चर किया था। जिसकी टीस उसके सीने में धधक रही थी। वहीं, दूसरा किरदार रेलवे ठेकेदार यशराज था। विक्रम यशराज की सारिका एंटरप्राइजेज के रेलवे फूड सप्लाई ठेके पर कब्जा जमाना चाहता था और लगातार रंगदारी के लिए उसे परेशान कर रहा था। जब जेल की सलाखों के पीछे टार्चर झेलने वाला विशाल बाहर आया और बाहर रंगदारी से परेशान यशराज एक-दूसरे से मिले तो दोनों ने विक्रम के खात्मे की ठान ली। इसके बाद दोनों ने अपने आकाओं से संपर्क साधा। जब दो परेशान लोग एक साथ मिले, तो उन्होंने अपने गैंग का पूरा सपोर्ट लेकर विक्रम की खूनी साजिश को अंजाम तक पहुंचा दिया।

अखिलेश गैंग पर जारी रहेगी जांच

विक्रम हत्याकांड में शुरुआती जांच में मुख्य रूप से भले ही गणेश सिंह गैंग का हाथ सामने आया है, लेकिन पुलिस अखिलेश गैंग की भूमिका को भी खंगाल रही है। दरअसल, विक्रम अखिलेश का बेहद करीबी था और काफी समय से विक्रम और अखिलेश के बीच संपर्क बंद हो गया था।

मौत के आठ किरदार और उनकी भूमिका

1. मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर: (गलगोटिया यूनिवर्सिटी का छात्र) अक्षत ने ग्रेटर नोएडा के अपने फ्लैट में हत्यारों को पनाह दी और हरिद्वार से भागने को यशराज की स्कार्पियो गाड़ी का इंतजाम किया।

2. राजकुमार: (यशराज का पिता) इस खूनी खेल का फाइनेंसर। शूटरों ने हरिद्वार में जो स्कूटर और बाइक किराये पर ली थी, उसका पेमेंट राजकुमार की ही यूपीआई आईडी से किया गया था।

3. आशुतोष सिंह (मुख्य शूटर): अपराध की दुनिया में डॉन बनने की चाहत रखने वाला आशुतोष इस हत्या की अहम भूमिका में था। इसी ने विशाल के साथ मिलकर विक्रम पर गोलियां बरसाईं।

4. विशाल सिंह (शूटर): आशुतोष का साथी। जेल में विक्रम के गुर्गों से हुए विवाद का बदला लेने के लिए इसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

5. अंकित वर्मा (रेकी): साजिश का सबसे अहम मोहरा। इसने तीन महीने पहले एनिटाइम फिटनेस में एडमिशन लिया, जहां विक्रम जिम करने जाता था। घटना वाले दिन इसी ने फोन कर विक्रम के बाहर निकलने की सटीक जानकारी दी।

6. यशराज (ठेकेदार): रेलवे में फूड सप्लाई का ठेकेदार। विक्रम इससे रंगदारी मांगता था और ठेका हथियाना चाहता था। इसी रंजिश में यशराज ने हत्या की साजिश में साथ दिया और भागने को अपनी स्कार्पियो गाड़ी उपलब्ध कराई।

7. आकाश कुमार प्रसाद (मददगार): घटना के बाद भागने के लिए हरिद्वार में इसी की आईडी पर किराये की बाइक और स्कूटर लिया गया था।

8. जितेन्द्र कुमार साहु (वाहन प्रदाता): गोली मारते वक्त शूटरों ने जिस अपाचे बाइक का इस्तेमाल किया (जिसे बाद में सहस्रधारा रोड पर छोड़ दिया गया) वह इसी के नाम पर पंजीकृत है।

पत्नी के आरोपों पर भाई भी जांच के दायरे में

इस हत्याकांड में पारिवारिक कलह का एंगल भी जांच के दायरे में है। विक्रम की पत्नी ने हत्या के बाद अपने ही देवर (विक्रम के भाई अरविंद) पर गंभीर आरोप लगाए थे। विक्रम अपने भाई अरविंद की मेंबरशिप पर ही जिम जा रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पत्नी के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है और इस पर जांच जारी है। इस पर स्थिति पूरी तरह से तभी स्पष्ट हो सकेगी जब मुख्य शूटर और मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त में आएंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here