ईरान-इजराइल युद्ध के कारण एलजीपी को लेकर मारामारी मची है। एजेंसियों पर लाइनें लगी हैं। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत केवल गैस एजेंसियों की लंबी लाइनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह घरों के भीतर सास-बहू के झगड़े का कारण भी बन रही है। बेवर कस्बे में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां गैस कम खर्च करने की सलाह देना एक सास को इतना भारी पड़ गया कि नाराज बहू सीधे थाने जा पहुंची। इस अनोखी शिकायत को सुनकर थाने में मौजूद पुलिसकर्मी भी अपनी हंसी नहीं रोक सके।
सास की ‘इकोनॉमी’ और बहू की जिद
मामला बेवर कस्बे के एक परिवार का है। पिछले कई दिनों से जिले में एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी कमी चल रही है। ऐसे में घर की बुजुर्ग सास ने भविष्य की चिंता करते हुए अपनी बहू को नसीहत दी कि गैस सिलेंडर का इस्तेमाल कम करें और संभव हो तो मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाएं ताकि इमरजेंसी के लिए कुछ गैस बची रहे। सास का तर्क था कि गैस एजेंसियों पर घंटों लाइन में लगने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
टीवी की खबर और थाने की दौड़
सास की यह बात आधुनिक विचारधारा वाली बहू को नागवार गुजरी। बहू का तर्क था कि उसने टीवी पर खबरों में देखा है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है। उसे लगा कि सास जानबूझकर उसे परेशान करने के लिए पुराने जमाने के चूल्हे पर खाना बनाने का दबाव डाल रही है। देखते ही देखते घर का सामान्य विवाद हाई वोल्टेज ड्रामे में बदल गया। गुस्से में लाल बहू बिना देर किए बेवर थाने पहुंच गई और पुलिस से सास की ‘शिकायत’ कर दी।
पुलिस की समझाइश और ‘हंसी का माहौल’
थाने में तैनात पुलिसकर्मी उस समय चौंक गए जब बहू ने लिखित या मौखिक रूप से कहा कि “मेरी सास मुझे गैस पर खाना नहीं बनाने दे रही।” पुलिस ने जब पूरे मामले की तहकीकात की और सास को बुलाया, तो सारा माजरा साफ हुआ। सास ने अपनी बेगुनाही में कहा कि वह सिर्फ किल्लत की वजह से बचत करना चाहती थी। पुलिसकर्मियों ने बहू को समझाया कि यह कोई आपराधिक मामला नहीं बल्कि पारिवारिक समझ का विषय है। पुलिस ने हल्के-फुल्के अंदाज में दोनों को समझाया कि इतनी छोटी बात पर पुलिस के पास आने के बजाय आपस में बैठकर समाधान निकालना चाहिए। अंततः पुलिस ने दोनों को समझा-बुझाकर वापस घर भेज दिया।








