उत्तराखंड में खनन के नियम बदले! रॉयल्टी बढ़ने से बोल्डर-बालू पर लगेगा टैक्स, घर बनाना भी महंगा

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उत्तराखंड में अब निर्माण कार्य महंगा हो जाएगा। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने उत्तराखंड में खनन रॉयल्टी की नई दरें लागू कर दी हैं। पिछली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के बाद राज्यपाल की स्वीकृति पर संशोधित उपखनिज नियमावली को लागू किया गया है। इससे खनन राजस्व में 50 करोड़ तक वृद्धि का अनुमान है। नए आदेशों के मुताबिक, 25 सेंटीमीटर से कम आकार वाली खनन सामग्री पर रॉयल्टी 88.50 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति टन कर दी गई है। 50 रुपये प्रति टन की अतिरिक्त रॉयल्टी भी देनी होगी।

सचिव बृजेश कुमार संत की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब नदी तल से अलग खनन पट्टों से प्राप्त खंडास, बोल्डर, बजरी, मिट्टी, बैलास्ट, सिंगल, पहाड़ों के क्षरण से प्राप्त मोरम और बालू पर रॉयल्टी बढ़ा दी गई है। अब 25 सेंटीमीटर से छोटे आकार की खनन सामग्री पर रॉयल्टी बढ़ा दी गई है। पहले इसके लिए 88.50 रुपये प्रति टन रॉयल्टी देनी पड़ती थी, जिसे बढ़ाकर 100 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। इसके अलावा 50 रुपये प्रति टन अतिरिक्त रॉयल्टी भी चुकानी होगी।

खनन रॉयल्टी बढ़ने से निर्माण सामग्री मंहगी होगी

वहीं, परिवहन विभाग में व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत 80 हॉर्स पावर तक के ट्रैक्टर-लोडर को खनन में उपयोग की मंजूरी दी गई। जल प्रवाह क्षेत्र से बाहर ही यह काम कर सकेंगे। खनन रॉयल्टी में वृद्धि से निर्माण सामग्री की कीमतों में असर के आसार हैं। वहीं, सरकार ने गौला, कोसी, दाबका नदी क्षेत्र में रॉयल्टी दरों में बदलाव नहीं किया है। हरिद्वार समेत अन्य क्षेत्रों में नदी तल स्थित राजस्व और वन भूमि के खनन पट्टों पर बालू, मोरम, बजरी और बोल्डर की रॉयल्टी एक रुपये प्रति कुंतल बढ़ाकर आठ रुपये प्रति कुंतल की गई है।

निजी भूमि के खनन पट्टे

निजी भूमि के खनन पट्टों में भी रॉयल्टी दरों में संशोधन हुआ है। मैदानी-पर्वतीय दोनों क्षेत्रों के लिए समान रॉयल्टी दर 8 रुपये कुंतल होगी। अतिरिक्त शुल्क की दरों में बदलाव नहीं हुआ है। मैदान में यह सात रुपये, पहाड़ में तीन रुपये कुंतल बनी रहेगी। कार्यदायी संस्थाओं के लिए रॉयल्टी में एक रुपये कुंतल की वृद्धि की गई।

भारी मशीनों पर प्रतिबंध

नई नियमावली के तहत खनन के लिए पोकलैंड, जेसीबी, सेक्शन मशीन और लिफ्टर जैसी भारी मशीनों के प्रयोग पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इनका प्रयोग केवल खनन क्षेत्र तक पहुंच मार्ग बनाने, बोल्डर हटाने या पट्टा क्षेत्र में फंसे वाहन निकालने में हो सकेगा। खान अधिकारी की संस्तुति पर एसडीएम से मंजूरी जरूरी होगी।

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