कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के तार भारत से जोड़ने की कोशिश कर चुके हैं। वहीं, खालिस्तानी समर्थन कनाडा से लेकर लंदन तक भारत के विरोध में प्रदर्शन कर चुके हैं।
खास बात है कि तमाम कोशिशों के बाद भी भारत सरकार या एजेंसियां किसी कट्टरपंथियों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए तैयार हैं। साथ ही खबर है कि भारत सरकार कनाडा को लेकर भी हर स्थिति के लिए तैयार नजर आ रही है।
ट्रूडो को नहीं मिल रहा समर्थन
भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर ट्रूडो सरकार ने कोई सबूत पेश नहीं किए हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि उन्होंने भारत को जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की थी। खास बात है कि उन्हें किसी साथी की तरफ से भारत के खिलाफ खास समर्थन नहीं मिला। हालांकि, इस मामले में अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया प्रतिक्रिया दे चुके हैं।
भारत को नहीं है किसी का डर
भारतीय सुरक्षा व्यवस्था को ट्रूडो के आरोपों से कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है। वे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर दुनियाभर में खालिस्तान आंदोलन का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। खबर है कि अगर खालिस्तान कट्टरपंथी विदेशों में भारतीय एसेट्स या भारत में किसी तरह का खतरा पैदा करते हैं, तो उनके खिलाफ एक्शन जारी रहेगा। ताजा तस्वीर से साफ हो रहा है कि कनाडा के आरोप लगाने के बावजूद भारत अपनी बात पर अडिग है और पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
ट्रूडो का अलग ही दांव
भारत सरकार जानती है कि ट्रूडो ने ग्रेटर ओंटारियो, वैंकूवर और कैलगरी क्षेत्रों में अपना वोट बढ़ाने के लिए भारत पर आरोप लगाए हैं। इसके बावजूद भारत किसी भी कीमत पर कनाडा के इस राजनेता को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की गरिमा को खराब करने की छूट नहीं दे रहा है। खास बात है कि कनाडाई पीएम इस मामले को बढ़ाना नहीं चाहते, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो भी नई दिल्ली तैयार है।
ट्रूडो के लिए सबक होंगे चीन और पाकिस्तान
कहा जा रहा है कि अगर टूडो अपने आरोपों को वापस नहीं लेते हैं, तो उन्हें द्विपक्षीय संबंधों के खराब होने की कीमत चुकानी पड़ सकती है। पठानकोट पर हमले के बाद पाकिस्तान और मई 2020 के बाद चीन के साथ भारत के रिश्ते टूडो के लिए सबक हो सकते हैं।
ऐक्शन पर ऐक्शन
कनाडाई पीएम ने जब संसद में कहा था कि निज्जर की हत्या में भारत के एजेंट्स का हाथ हो सकता है, तब विदेश मंत्री मेलनी जॉली ने कुछ समय बाद ही भारतीय राजनयिक को बाहर करने का फैसला कर लिया था। इसके बाद जवाब में भारत ने पहले तो आरोपों से इनकार किया और फिर कनाडाई राजनयिक को निष्कासित करने का ऐलान कर दिया।
भारत ने कनाडा में रह रहे अपने नागरिकों के लिए न केवल एडवाइजरी जारी की, बल्कि कनाडा में अपनी वीजा सेवाओं पर भी अस्थाई रूप से रोक लगा दी। अब खबर है कि भारत सरकार ने कनाडा से 10 अक्टूबर तक अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने के लिए कह दिया है।