आपातकाल के दौरान जेल में बंद लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सरकार ने पेंशन देने की बात की तो इसमें भी ऐसे लोग निकल आए जिन्होंने इसे कमाई का जरिया बना लिया। कीडगंज के एक शख्स ने एक-दो नहीं, बल्कि 49 सालों तक पेंशन ली और बाद में जब इसकी शिकायत सरकार से की गई तो शासन ने जांच का निर्देश दिया। जांच में शिकायत सही पाई गई।
1975 में जब आपातकाल लागू हुआ तो तमाम लोग जेल में बंद हुए। जिले के भी कई लोग इसमें शामिल थे। बाद में आपातकाल खत्म हुआ और दूसरी सरकार आई तो इस काल में जेल में बंद लोगों को मीसा बंदी का नाम दिया गया और उन्हें पेंशन दी जाने लगी। कीडगंज कृष्णा नगर के निवासी राजेश कुमार गुप्ता को भी पेंशन दी जाने लगी। राजेश ने इतने सालों में 18 लाख से अधिक राशि पेंशन के रूप में ली।
पिछले साल जिले के अमरेश कुमार ने इसकी शिकायत शासन में की और कहा कि उन्हें गलत पेंशन मिल रही है। सरकार इसकी जांच कराए। प्रदेश सरकार ने जांच का आदेश दिया तो छह सदस्यीय कमेटी बैठाई गई और मामले की जांच हुई। जांच कमेटी ने रिपोर्ट सही पाई और पेंशन निरस्त कर रिकवरी का आदेश दिया।
20 हजार रुपये दी जाती है पेंशन
लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को वर्तमान में 20 हजार रुपये की मासिक पेंशन दी जाती है। इसकी शुरुआत 500 रुपये महीने से हुई थी। बाद में प्रदेश की सरकारों ने अलग-अलग समय में इसे बढ़ाया और वर्तमान में 20 हजार रुपये की पेंशन दी जा रही है।
जिले में 114 हैं लोकतंत्र रक्षक
जिले में वर्तमान में 114 लोग लोकतंत्र रक्षक सेनानी हैं। इन लोगों को पेंशन दी जा रही है। पेंशन के लिए प्रशासन में एक कर्मचारी अलग से नियुक्त है और विशेष वरियता पर इनकी पेंशन जारी करने का निर्देश दिया गया है।
अफसरों पर हो सकती है कार्रवाई
शासन के निर्देश पर सही पाए जाने के बाद अब उन अफसरों पर भी कार्रवाई की हो सकती है, जिनके समय में यह आदेश बनाया गया और जिनके कार्यकाल में पेंशन जारी की गई।
एडीएम प्रशासन, पूजा मिश्रा ने कहा कि कीडगंज के राजेश कुमार के खिलाफ आई शिकायत के बाद जांच कराई गई। बाकायदा छह सदस्यीय कमेटी बैठी थी, जिसने यह पाया कि पेंशन का गलत तरीके से भुगतान लिया गया है। उनकी पेंशन निरस्त कर दी गई है।









