उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज भाजपाई तीरथ सिंह रावत के भांजे के साथ 18 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पूर्व सीएम के भांजे ने दून पुलिस पर मामले में कार्रवाई नहीं करने और आरोपियों को ऑफिस में चाय पिलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर आत्महत्या की चेतावनी दी है। आरोप लगाया कि उत्तराखंड में मरने के बाद ही पुलिस केस दर्ज करती है। वहीं, एसएसपी अजय सिंह ने एसपी सिटी को मामले की जांच सौंप दी है।
मामला क्या है
दून के डाकरा गढ़ी निवासी बिक्रम राणा का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। वीडियो में बिक्रम ने बताया कि उनके साथ आठ लोगों ने धोखाखड़ी की है। इस मामले में उन्होंने 29 दिसंबर 2024 को एसएसपी कार्यालय देहरादून में शिकायत की थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
आरोपियों से पुरानी पहचान
बिक्रम राणा ने बताया कि आरोपी पक्ष से उनकी पुरानी पहचान है। पुरुकुल देहरादून में एक कंपनी की कई एकड़ जमीन है। आरोपियों ने उन्हें इसमें से 25 बीघा जमीन दिलाने के लिए बतौर एडवांस 01.81 करोड़ रुपये लिए थे। बाद में पता चला कि उक्त जमीन में दो अन्य कंपनियों का हिस्सा भी है। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने कहा कि अगर वह दोनों कंपनियों को भुगतान कर दें और जमीन उनकी हो जाएगी। यह भी भरोसा दिया कि 2025 में भूमि का विक्रय अनुबंध कर दिया जाएगा। बिक्रम ने एक कंपनी के खाते में 10.10 करोड़ और दूसरी कंपनी के खाते में 6.25 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि दोनों कंपनियां आरोपियों की हैं। साजिश के तहत उनसे रुपये लिए गए।
प्रदेश में मरने के बाद दर्ज हो रहे केस
शिकायतकर्ता बिक्रम राणा ने बताया कि उन्होंने इस बाबत एसएसपी अजय सिंह से शिकायत की थी। वायरल वीडियो में बिक्रम कह रहा है कि पुलिस उससे ही पूछताछ कर रही है, जबकि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पुलिस मरने के बाद केस दर्ज करती है तो वह भी यही करेंगे।
एसपी सिटी करेंगे मामले की जांच
बिक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद एसएसपी अजय सिंह ने मामले में जांच बैठा दी है। एसपी सिटी को जांच करके रिपोर्ट देने को कहा गया है। एसएसपी ने कहा कि उक्त व्यक्ति ने पूर्व में उन्हें शिकायत की थी। सीओ मसूरी मामले की जांच कर रहे थे। पुलिस ने सभी पक्षों से वार्ता भी की। मामला दीवानी प्रकृति का है। व्यक्ति को न्यायालय में वाद दायर करने के लिए कहा गया था।









