महिलाओं की सुरक्षा में कौन कहां खड़ा; टॉप-10 असुरक्षित शहरों में देहरादून; पूरी लिस्ट

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महिला सुरक्षा को लेकर जारी किए गए राष्ट्रीय वार्षिक महिला सुरक्षा रिपोर्ट एवं सूचकांक (नारी-2025) ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की इस रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी देहरादून देश के 10 सबसे असुरक्षित शहरों में शामिल हो गया है। एक नजर देश के सबसे असुरक्षित शहरों पर भी।

यह रिपोर्ट देश के 31 शहरों में 12,770 महिलाओं के सर्वे पर बनी है। इस सर्वे में महिलाओं की सुरक्षा धारणा, उत्पीड़न की घटनाओं और संस्थागत प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। देहरादून का इस स्थिति में पहुंचना स्थानीय प्रशासन और शहरवासियों के लिए चिंता का विषय है। नारी-2025 के अनुसार देश का राष्ट्रीय सुरक्षा स्कोर 64.6% है। देहरादून (60.6 प्रतिशत) इस औसत तक नहीं पहुंच पाया।

महिलाओं का अनुभव

सर्वे में शामिल 40% महिलाओं ने बताया कि वे अपने शहर में कम सुरक्षित या असुरक्षित महसूस करती हैं। देहरादून में रात के समय सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। महिलाओं ने पड़ोस (38%) और सार्वजनिक परिवहन (29%) को उत्पीड़न के प्रमुख स्थानों में बताया है। दिन में यहां 70 प्रतिशत महिलाएं खुद को सुरक्षित मानती हैं। रात में यह औसत 44 प्रतिशत पर आ जाता है।

हिमाचल टॉप 11 में शामिल

पड़ोसी राज्य हिमाचल की राजधानी शिमला की बात करें तो यह शीर्ष से 11वें स्थान पर है। रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि केवल एक-तिहाई महिलाएं ही उत्पीड़न की घटनाओं को अधिकारियों को रिपोर्ट करती हैं। ऐसे में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े भी असल स्थिति को सामने नहीं ला पा रहे हैं। देहरादून में केवल 25% महिलाओं ने पुलिस या अधिकारियों पर भरोसा जताया कि उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई होगी। देहरादून में सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुलिस की उपस्थिति और गश्त को बढ़ाने का सुझाव महिलाओं ने दिया है।

ये हैं देश के सुरक्षित शहर

कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहरों में शामिल हैं। वहीं राष्ट्रीय औसत से खराब शहरों में दून के अलावा रायपुर, चेन्नई और शिलांग शामिल हैं।

एसएसपी देहरादून अजय सिंह का कहना है कि सर्वे बहुत सीमित संख्या पर आधारित है। महिलाओं पर अपराध की शिकायतें भी बहुत कम हैं। गौरा चीता महिलाओं तक शहर में गश्त करती हैं। महिला हेल्प डेस्क हर थाने में उपलब्ध है।

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