मोबाइल में घंटों तक रील्स देखने का चस्का, सोशल मीडिया, शॉपिंग ऐप पर व्यस्तता और ऑनलाइन गेमिंग की लत लोगों को बीमार कर रही है। ऐसे लोग सिरदर्द और नींद में कमी के साथ चिड़चिड़ेपन के शिकार हो रहे हैं।
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मानसिक रोग विभाग की एचओडी डॉ. जया नवानी ने बताया कि रोजाना की ओपीडी औसतन सौ तक पहुंच जा रही है। 15 से 20 लोग नेट एडिक्शन के शिकार होते हैं। महिलाओं में रील्स देखने की समस्या बढ़ी है। वे सोशल मीडिया में लाइक्स, कमेंट के चक्कर में ज्यादा समय गुजार रही हैं। उन्हें खुद को खेलकूद, योगा, व्यायाम, पुस्तकें पढ़ने की सलाह दी जा रही है।
डॉक्टरों को बनाएंगे एक्सपर्ट
प्रदेश में आ रही आपदाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब हर अस्पताल में डॉक्टरों को प्रभावितों का मानसिक स्वास्थ्य ठीक रखने को लेकर एक्सपर्ट बनाया जाएगा। स्टेट मानसिक अस्पताल सेलाकुई में 17 अक्तूबर से बंगलौर निमहंस के विशेषज्ञ ट्रेनिंग देंगे। इस बारे में सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि हर अस्पताल से एक डॉक्टर को ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा।
यह हैं उदाहरण
- 25 वर्षीय एक युवक ओपीडी में तनाव की समस्या लेकर आया। दो बार काउंसलिंग कराने पर पता चला कि ऑनलाइन गेमिंग में उसने डेढ़ लाख रुपये गंवा दिए। इसकी वजह से वो अब तनाव में चला गया है। उसका इलाज चल रहा है।
- 40 वर्षीय एक महिला सिरदर्द, नींद एवं भूख में कमी को लेकर डाॅक्टर के पास पहुंची। पता चला कि रोजाना घंटों तक मोबाइल पर रील्स देखती हैं। दो साल के बच्चे पर भी ध्यान नहीं दे पा रही और खाना भी कई बार जल गया।
ऑनलाइन कई दोस्त, अंदर से अकेले
मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदु छाबड़ा ने बताया कि वर्तमान में हम डिजिटल दुनिया से तो जुड़े हैं, सोशल मीडिया पर सैकड़ों दोस्त हैं, लेकिन भीतर से ज्यादा अकेले होते जा रहे हैं। लाइक, कमेंट में संतुष्टि खोज रहे हैं। तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ रहा है। जैसे शरीर की देखभाल जरूरी है, उसी तरह मन की भी। डिजिटल स्क्रीन से ज्यादा रिश्ते और जीवन को महत्व दें।











