रामनगर के पास स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ‘हाई अलर्ट’ पर है। प्रशासन ने दिवाली के मौके पर जंगल में चौकसी बढ़ा दी है। पार्क प्रबंधन ने सभी फील्ड कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। इतना ही नहीं रात की गश्त भी तेज कर दी गई है।
क्या है वजह?
दरअसल, तंत्र-मंत्र टोटकों और अन्य तांत्रिक गतिविधियों, अंधविश्वास के चलते हर साल दिवाली के समय उल्लुओं के शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं। अंधविश्वास है कि लक्ष्मी पूजा के दौरान उल्लू की बलि देने से धन की प्राप्ति होती है। इसी कारण देशभर में उल्लुओं की तस्करी और हत्या के मामले सामने आते हैं।
हर जोन में स्पेशल गश्त
कॉर्बेट प्रशासन ने कहा कि उल्लू का शिकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी खतरनाक है। उल्लू पर्यावरण में कृंतक नियंत्रण के तौर पर अहम भूमिका निभाते हैं। उल्लुओं के शिकार को रोकने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में जंगल के हर जोन बिजरानी, ढिकाला, झिरना, ढेला और दुर्गा देवी में विशेष गश्त की जा रही है।
यूपी वन विभाग भी दे रहा साथ
कॉर्बेट की दक्षिणी सीमा जो यूपी से लगती है, वहां पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। मुहिम में उत्तर प्रदेश वन विभाग भी कॉर्बेट प्रशासन के साथ मिलकर अभियान चला रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के एसडीओ अमित ग्वासाकोटी ने बताया कि दिवाली के दौरान उल्लू के शिकार को रोकने के लिए हमने पूरी टीम को अलर्ट किया है।
कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के एसडीओ अमित ग्वासाकोटी ने आगे कहा कि सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करते हुए गश्त बढ़ाई गई है। सीमा क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। लोगों से अपील है कि यदि किसी को उल्लू के अवैध शिकार की जानकारी मिलती है तो तुरंत वन विभाग को सूचित करे।
देश का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क
बता दें कि जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क देश का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क है और 1936 में लुप्तप्राय बंगाल बाघ की रक्षा के लिए हैंली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। इसका नाम जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया था। जिम कॉर्बेट ने इस पार्क की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।










