गन्ना प्रजाति 0238 की बुआई बिल्कुल न करे किसान : कृषि वैज्ञानिक

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गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र द्वारा ग्राम कुंडेश्वरी में एक दिवसीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को गन्ना बुवाई से संबंधित जानकारी दी गई। शुक्रवार को काशीपुर के कुंडेश्वरी में गन्ना संस्थान के द्वारा कृषि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जहां उन्होंने प्रचार एवं जनसंपर्क अधिकारी नीलेश कुमार ने नव घोषित सट्टा नीति के विषय में किसानों को बताया। कहा कि शरद कालीन गन्ना बुवाई का समय आ गया है। जिन गन्ना किसानों को शरद कालीन गन्ना की बुवाई करनी है। वह उत्तम बीज का चुनाव करें। प्रत्येक गन्ना कृषक अपने खेत का निरीक्षण करें और जो भी बीमारी के लक्षण उसमें पाए जाएं।

उसका फोटो लेकर गन्ना शोध केंद्र के वैज्ञानिकों को भेज दे। जहां फोन पर ही तत्काल सहायता उपलब्ध कर दी जाएगी। भूमि में 16 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिसकी जांच करने पर हमें पता चलेगा कि हमारी भूमि में कौन से तत्व की कमी है तथा उसकी पूर्ति करने से हमारी जमीन की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। इस गोष्ठी का उद्देश्य गन्ना कृषकों को उन्नत प्रजाति की गन्ना बीज की जानकारी, गन्ने की फसल में लगने वाली तरह-तरह के बीमारियों तथा उसमें प्रयोग की जाने वाली दवाईयां तथा उस पर गन्ने की वैज्ञानिक विधि से कृषि कैसे करें था।

गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक द्वारा बताया गया कि वर्तमान में 15023, 13235, 14201 जैसी उन्नतशील प्रजातियां हैं। वर्तमान में 0238 प्रजाति रेड रोड की चपेट में आ गई है। इस प्रजाति के गन्ने की बुवाई बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। गोष्ठी में गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक संजय कुमार, सिद्धार्थ कश्यप समेत गन्ना विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी मौजूद रहे।

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