उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 10 किलोमीटर लंबे चार-लेन वाले हाईवे प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली एक याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की और केंद्र व राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर उनसे अपना जवाब दाखिल करने को कहा। इस याचिका को रामनगर के रहने वाले जगमोहन रावत और अन्य लोगों ने मिलकर दायर किया है, जिस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने आदेश जारी किया।
इस याचिका के जरिए केंद्र सरकार द्वारा जुलाई 2024 और जुलाई 2025 में रामनगर और काशीपुर के बीच हाईवे के हिस्से के संबंध में जारी की गई अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि अधिसूचनाओं में सड़क के दोनों ओर की जमीन को गलती से कृषि संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
‘रिहायशी जमीन को बताया खेती की जमीन’
उन्होंने तर्क दिया कि जमीनी हकीकत यह है कि वहां खेती की जमीन के बजाय कई घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रभावित लोगों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, क्योंकि मुआवजे का आकलन कम कृषि दरों पर किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने आगे दावा किया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने उनकी आजीविका पर बुरा असर डाला है और इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि किसकी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।
उनकी इस याचिका पर सुनवाई करने के बाद हाई कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार दोनों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह यानी 28 दिनों के अंदर उनसे अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
तेजी से चल रहा देहरादून बाईपास का काम; NHAI
उधर एक अन्य घटना में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि देहरादून-दिल्ली आर्थिक गलियारे से जुड़े देहरादून बाईपास का तेजी से निर्माण किया जा रहा है, जिससे ना केवल शहर में भीड़ कम होगी बल्कि यातायात का भी बेहतर तरीके से संचालन किया जा सकेगा। इस बारे में जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) उत्तराखंड में 12 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड चार-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड बाईपास का निर्माण कर रहा है, जो दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ा होगा।
इस परियोजना के तहत झझरा से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के पांवटा साहिब-बल्लूपुर खंड को जोड़ने वाले नए ग्रीनफील्ड मार्ग का विकास किया जा रहा है, जो आशारोरी चेक पोस्ट के पास दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़कर समाप्त होगा। NHAI के अनुसार लगभग 716 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में अब तक करीब 44 प्रतिशत काम हो चुका है और इसके अगले साल अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है।








