उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फाइनेंस कंपनियों द्वारा लोन पूरा न चुकाने पर वाहन जब्त करने को अवैध और संवैधानिक करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) कर्ज की वसूली के लिए बलपूर्वक वाहन कब्जे में नहीं ले सकती। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने कहा कि विधि सम्मत प्रक्रिया अपनाए बिना की गई ऐसी कार्रवाई अवैध, मनमानी और असंवैधानिक है।
यह आदेश मोहन लाल और राजेंद्र सिंह की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया गया, जिन्होंने इंडोस्टार कैपिटल फाइनेंस लिमिटेड की वसूली कार्रवाई को चुनौती दी थी। ट्रांसपोर्टर मोहन लाल ने मालवाहक वाहन के लिए 31,40,848 रुपये का ऋण लिया था। वह 14,66,850 रुपये चुका चुके थे और जून 2023 तक मात्र 1,84,030 रुपये बकाया थे, जबकि अतिरिक्त 47,994 रुपये जोड़े गए। जून 2023 में वसूली एजेंटों ने रास्ते में वाहन कब्जे में ले लिया।










