जहां देखो वहां भ्रष्टाचार, आईएएस रिंकू सिंह ने आउटसोर्स के नाम पर चल रहे बड़े खेल की पोल खोली

0
97

पीसीएस अधिकारी रहते समाज कल्याण विभाग में घोटाले का पर्दाफाश करके सात गोलियां खाने वाले रिंकू सिंह राही ने अब आईएएस बनने के बाद परिवहन विभाग में आउटसोर्सिंग के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल को पकड़ा है। जालौन में संयुक्त मजिस्ट्रेट (SDM न्यायिक, उरई) के पद पर तैनात रिंकू सिंह ने एक तरह से सरकारी कार्यालयों में टेंडर व्यवस्था के नाम पर चल रहे संगठित भ्रष्टाचार की कलई खोल दी है। जिस जेम पोर्टल से टेंडरिंग को सरकार की तरफ से बेहद पारदर्शी व्यवस्था बताई जाती है उसका भी एक तरह से मखौल ही उड़ा दिया है।

रिंकू सिंह को आउटसोर्सिंग के तहत मिले शासकीय वाहन और चालक की नियुक्ति को लेकर पाई गई गंभीर अनियमितताओं पर परिवहन और श्रम विभाग के आयुक्तों को पत्र भेजा है। उन्होंने अपनी पीड़ा को और संकल्प को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी बयां किया है। कहा कि जहां देखो वहीं भ्रष्टाचार मौजूद है। यदि इसे एकदम रोक नहीं सकता तो उजागर करके ऑन द रिकॉर्ड ला ही सकता हूं। शायद इसे रोकने की स्थिति में बैठे जिम्मेदारों को थोड़ी सी शर्म आए, या भ्रष्टाचार करने वालों में थोड़ा डर पैदा हो।

उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई में आने वाले खतरों से बेखौफ होकर एक बार फिर अपना पुराना मिजाज भी दोहराया है। कहा कि अपना क्या… जोखिम, लेकिन वही पुराना राग- सब कुछ लुटाने की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जेम पोर्टल के जरिए भी टेंडरिंग के बाद भी इतने बड़े भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

जेम पोर्टल और टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का भंडाफोड़

श्रम आयुक्त और परिवहन आयुक्त को भेजे गए पत्र में रिंकू सिंह ने खुलासा किया कि जेम (GeM) पोर्टल से मैनपुरी की एजेंसी ‘हनी इंटरप्राइजेज’ के जरिए उन्हें जो बोलेरो गाड़ी आवंटित की गई थी, वह निजी नंबर (सफेद प्लेट) की है। पीली नंबर प्लेट वाली कामर्शियल वाहन को सरकारी कार्य में नहीं लगाना सीधे तौर पर परिवहन नियमों और टेंडर की शर्तों का उल्लंघन है। उन्होंने लिखा कि आपत्ति जताने और गाड़ी बदलने के निर्देश के बावजूद एजेंसी ने दोबारा वही गाड़ी भेज दी है।

असंभव कम दरों पर टेंडर का खेल

उन्होंने पत्र में लिखा कि सरकारी कार्यालयों की मिलीभगत से पसंदीदा वेंडर को टेंडर दिलाने के लिए जानबूझकर नाममात्र की दरें भरवाई जाती हैं। फिर कागजी कोरम पूरा कर घटिया सेवा ली जाती है। ठेकेदार कामर्शियल गाड़ी के बजाय निजी गाड़ियों को सरकारी काम में लगा देते हैं और मोटा कमीशन वसूलते हैं।

चालक को केवल 6000 मासिक वेतन

रिंकू सिंह ने आउटसोर्सिंग के तहत गाड़ी पर कार्यरत ड्राइवरों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम देने का आरोप लगाया। कहा कि चालक को केवल 6000 प्रतिमाह दिया जाता है। यह भुगतान भी कई-कई महीनों तक अटका कर रखा जाता है। किसी अधिकारी के साथ मौजूद वाहन चालक को जब नाम मात्र का वेतन मिलेगा और वह भी महीनों तक नहीं मिलेगा तो वह भ्रष्टाचार के साथ अवैध वसूली की कोशिश करेगा।

कहा कि कलक्ट्रेट जैसे मुख्य प्रशासनिक केंद्रों में चल रहा यह शोषण और भ्रष्टाचार सुशासन की नींव को खोखला कर रहा है। जो अधिकारी नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराना चाहता है, उन्हें व्यवस्था के खिलाफ जाकर व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

केस स्टडी के रूप में जांच की मांग

रिंकू सिंह राही ने व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग के साथ ही पूरे मामले को एक ‘केस स्टडी’ बनाकर पूरे प्रदेश स्तर पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था का परीक्षण करने की मांग की।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here