14 की दुल्हन और 17 साल का दूल्हा… शादी पर अड़े थे दोनों, मंडप पर ही पुलिस से भिड़ गए

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जिस आयु में बच्चों के हाथों में किताबें और सपनों की उड़ान होनी चाहिए, उस उम्र में एक नाबालिग लड़की और लड़के की शादी की तैयारी ने सवाल खड़े कर दिए। रविवार को देहरादून के लक्ष्मण चौक इलाके में 14 वर्षीय किशोरी और मुजफ्फरनगर निवासी 17 वर्षीय किशोर के विवाह की सूचना पर प्रशासन में हड़कंप मच गया। बताया गया है कि दोनों नाबालिग शादी पर अड़े थे और उनके परिवारजन भी। लेकिन पुलिस और प्रशासन की टीम ने बाल विवाह रुकवाया तो वे पुलिस से ही भिड़ गए। मौके पर काफी हंगामा हुआ।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, समर्पण संस्था, चाइल्डलाइन और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम ने समय रहते विवाह रुकवा दिया, लेकिन इसके बाद वहां हालात तनावपूर्ण हो गए।

शादी की जिद पर अड़े थे दोनों नाबालिग

नाबालिगों के परिजनों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया। काफी देर तक टीम और परिजनों के बीच बहस होती रही। दूसरी ओर, दोनों किशोर-किशोरी एक-दूसरे से विवाह की इच्छा जता रहे थे, लेकिन कानून के मुताबिक इतनी कम उम्र में शादी की अनुमति ही नहीं है। ऐसे में अधिकारियों ने समझाया कि यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य बबीता सहोत्रा ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा सकती। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि बाल अधिकारों का हनन होता दिखे तो तत्काल प्रशासन को सूचना दें।

बच्चों को जिम्मेदारी के बोझ तले न दबाएं

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि जिन हाथों में भविष्य की किताबें होनी चाहिए, क्या उन हाथों में विवाह की जिम्मेदारी सौंपना उचित है? बचपन को समय से पहले जिम्मेदारी के बोझ तले दबाने के बजाय सुरक्षित, शिक्षित भविष्य देने की जरूरत है।

किशोरी नारी निकेतन और किशोर पुलिस संरक्षण में

टीम ने किशोरी को रेस्क्यू कर नारी निकेतन भेज दिया, जबकि किशोर को संरक्षण में ले लिया गया। वहीं, दोनों नाबालिगों के परिजन भी चौकी पहुंचे, जहां देर तक हंगामा चलता रहा। पुलिस ने अभिभावकों से पूछताछ शुरू कर दी है और इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सोमवार को दोनों नाबालिगों को संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाएगा। इसके बाद काउंसलिंग और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष डॉ.गीता खन्ना ने कहा कि बालिका और किशोर की काउंसलिंग कराएंगे। दोनों के माता और पिता से भी इस पूरे प्रकरण में बात की गई है।

बाल विवाह पर कानून

● लड़कियों की न्यूनतम आयु: 18

● लड़कों की न्यूनतम आयु: 21 वर्ष

● बाल विवाह है दंडनीय अपराध

● सजा: कारावास और जुर्माना

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