2027 के रण में भाजपा और कांग्रेस ने तय किया टिकट फॉर्मूला, ‘जिताऊ-टिकाऊ’ नेताओं पर ही दांव

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उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। दोनों पार्टियों को ऐसे उम्मीदवारों की तलाश है जो उनके मिशन को जीत की दहलीज पार करा सकें। भाजपा ने टिकट के इच्छुक नेताओं से औपचारिक आवेदन मांगे हैं, जबकि कांग्रेस ने दूसरे चरण का सर्वे शुरू कर स्पष्ट कर दिया है कि टिकट केवल जिताऊ और संगठन के प्रति टिकाऊ उम्मीदवारों को ही मिलेगा। दोनों दल उम्मीदवार चयन में सख्त मानदंड अपनाने की तैयारी में हैं। पेश है दोनों पार्टियों की तैयारियों पर विशेष रिपोर्ट…

भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत दावेदारों को विधानसभा स्तर की कोर कमेटी में आवेदन करने के लिए कहा गया है। हालांकि सोशल मीडिया में दावेदारी जताने वालों को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

भाजपा का लक्ष्य है हैट्रिक

भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों में हैट्रिक का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पार्टी विशेष रणनीति के तहत काम कर रही है। जीत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सर्वाधिक जीत वाले प्रत्याशी के चयन का फार्मूला भी तैयार किया गया है। ऐसे में अब पार्टी ने विधानसभा स्तर पर दावेदारों से आवेदन करने की हरी झंडी दे दी है। चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी दावेदारों को विधानसभा स्तर की कोर कमेटी के सामने आवेदन करने को कहा गया है। कमेटी विधानसभा स्तर पर आने वाले सभी नामों की स्क्रीनिंग करेगी और उसमें से सात से आठ नामों का पैनल तैयार कर जिला स्तरीय कोर कमेटी को भेजेगी।

स्टेट कमेटी तैयार करेगी पैनल

विधानसभा के बाद जिला स्तर की कोर कमेटी नामों पर विचार करेगी और पांच नाम राज्य स्तरीय कोर कमेटी को भेजे जाएंगे। राज्य स्तरीय कमेटी में चर्चा के बाद सर्वाधिक उपयुक्त तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। यह पैनल केंद्रीय पार्लियामेंटरी बोर्ड को भेजा जाएगा और बोर्ड का फैसला ही अंतिम होगा।

सोशल मीडिया-सार्वजनिक दावेदारी अनुशासनहीनता

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी दावेदारों से दावेदारी पार्टी फोरम पर ही रखने को कहा। उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान ने सार्वजनिक रूप से दावेदारी को अनुशासन के खिलाफ माना है। उन्होंने पार्टी नेताओं को ऐसा न करने की नसीहत दी। भट्ट ने कहा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनावी महत्वाकांक्षा स्वाभाविक है। लेकिन पार्टी के तय फोरम की बजाय इसे अलग-अलग मंचों पर व्यक्त करना अनुशासन के खिलाफ माना गया है। उन्होंने पार्टी के कई नेताओं द्वारा सार्वजनिक दावेदारी पर नाराजगी भी जताई।

‘टिकाऊ’ भी होगा टिकट का पैमाना

विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी चयन के लिए कांग्रेस के सर्वे का दूसरा चरण शुरू हो गया। हाईकमान के निर्देश पर विधानसभावार सभी दावेदारों और संभावित प्रत्याशियों का आकलन किया जा रहा है। चयन में केवल जिताऊ और साथ में टिकाऊ होना ही मायने रखेगा और यह फार्मूला हर विधानसभा में लागू होगा।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सोमवार को हिन्दुस्तान से बातचीत में इस फार्मूले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यदि सर्वेक्षण में कोई व्यक्ति श्रीनगर सीट पर उनसे ज्यादा जीत की संभावना वाला पाया जाता है तो वह अपना दावा छोड़कर उसी को आगे कर उसकी जीत के लिए काम करेंगे। बकौल गोदियाल, पार्टी का लक्ष्य विधानसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार लाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर नेता-कार्यकर्ता को हाईकमान के दिशानिर्देश के अनुसार समर्पित होकर काम करना है।

मालूम हो कि कांग्रेस हाईकमान को उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों से काफी उम्मीदें हैं। खास रणनीति के तहत कांग्रेस हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। अभी हाल में पार्टी ने राजनीतिक सर्वेक्षण कर प्रदेश के चुनावी मुद्दों को तय किया है। अब दो चरणों में संभावित प्रत्याशियों के चयन की तैयारी की जा रही है। अक्टूबर तक सभी सर्वे पूरे होने हैं।

टिकट पर रुख सख्त

प्रत्याशी चयन पर हाईकमान का रुख सख्त है। प्रदेश प्रभारी शैलजा साफ कर चुकी हैं कि यदि जिलाध्यक्ष चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं तो उन्हें इस्तीफा देना होगा। जिलाध्यक्ष इस फरमान से नाराज हैं, लेकिन पार्टी का कहना है कि यदि वे चुनाव लड़ेंगे तो सीमित दायरे में बंध जाएंगे। उन्हें पूरे जिले की सीटों की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

एक परिवार-एक टिकट

प्रदेश प्रभारी साफ कर चुकी हैं कि एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा। इस नियम के तहत नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य आगामी चुनाव में अपने पुत्र को चुनाव मैदान में न उतारने का ऐलान कर चुके हैं। आर्य के पुत्र नैनीताल से पूर्व विधायक संजीव आर्य नैनीताल सीट से इस बार भी स्वाभाविक दावेदार थे।

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